दस्यु फूलन से लोकसभा सदस्य श्रीमती फूलन देवी बनने की यात्रा न सम्भव थी न निष्कंटक, इसे सम्भव बनाया "नेताजी" जी.

छिंदवाड़ा : वीपी सिंह के मुख्यमंत्री काल में घटित बेहमई घटना के बाद दस्यु के रूप में जानी जाने वाली फूलन देवी के ऊपर नेताजी श्री मुलायम सिंह यादव जी की सरकार नें सन 1994 में जब दर्ज मुक़दमे वापस लिये तो राजनीतिक और सामाजिक हलचल अचानक गर्म हो उठी...उससे भी आगे जब नेताजी ने सन 1996 के लोकसभा चुनाव में "मिर्जापुर-भदोही" सीट से समाजवादी पार्टी का प्रत्याशी बनाया तो विरोध में आवाजें मुखर होने लगी.

लेकिन नेताजी को इससे फर्क़ नहीं था...वह जानते थे कि फूलन देवी का प्रतिरोध "अन्यायी और अत्याचारी व्यवस्था था न कि किसी जाति या वर्ग विशेष से". वह अति पिछडे समाज की महिला को संसद भेजकर समाज को संदेश देना चाहते थे कि राजनीति और समाज की तस्वीर बदल रही है, और यह काम उन्होंने बखूबी किया. यह नेताजी की ताकत थी कि उन्होंने एक नहीं बल्कि दो बार श्रीमती फ़ूलन देवी को संसद में पहुचाने का कार्य किया. यदि उनकी हत्या न हुई होती तो शायद यह यात्रा अनवरत जारी रहती.

फूलन देवी की हत्या के बाद नेताजी और अमर सिंह जी ने अपने कंधों पर उनको इस संसार से विदा किया.
किसी के लिए फूलन बनकर प्रतिरोध करना अत्यंत कठिन है...लेकिन "नेताजी" बनकर उनको न्याय दिलाना उससे भी कठिन.