गिधवा टैंक में प्रवासी मल्लार्ड का आगमन, बढ़ी क्षेत्र की पहचान
रायपुर : छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध पक्षी विहार क्षेत्र गिधवा टैंक में इस वर्ष अक्टूबर 2025 में एक खास प्रवासी मेहमान ने दस्तक दी। यह मेहमान है सुंदर और आकर्षक जलपक्षी मल्लार्ड बत्तख, जिसने पहली बार यहां अपना आगमन दर्ज कराया।
लंबी प्रवासी यात्रा पूरी कर आई यह मल्लार्ड गिधवा टैंक के शांत और स्वच्छ वातावरण में सहज रूप से बस गई। यहां उपलब्ध सुरक्षित आवास, भरपूर जल और प्राकृतिक भोजन ने उसे रुकने के लिए अनुकूल माहौल दिया। धीरे-धीरे वह अन्य स्थानीय और प्रवासी पक्षियों के साथ घुल-मिल गई और क्षेत्र का हिस्सा बन गई।
गिधवा टैंक अपनी समृद्ध जैव-विविधता और पक्षी प्रेमियों के लिए विशेष पहचान रखता है। मल्लार्ड के आगमन से यह क्षेत्र और भी आकर्षण का केंद्र बन गया है। पक्षी प्रेमी और प्रकृति पर्यवेक्षक इस दुर्लभ अतिथि को देखने और उसके व्यवहार का अध्ययन करने के लिए उत्साहित हैं।
यह इस बात का प्रमाण है कि राज्य में जलाशयों के संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयास सफल हो रहे हैं। सुरक्षित और अनुकूल वातावरण मिलने पर प्रवासी पक्षी यहां रुकना पसंद कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभागों द्वारा निरंतर संरक्षण कार्य, जनजागरूकता और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के कारण गिधवा टैंक आज प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय बन चुका है।
मल्लार्ड का यह आगमन न केवल क्षेत्र की प्राकृतिक समृद्धि को दर्शाता है, बल्कि छत्तीसगढ़ की पारिस्थितिक महत्वता को भी उजागर करता है। यह कहानी बताती है कि जब संरक्षण और संवर्धन के प्रयास लगातार किए जाते हैं, तो प्रकृति भी सकारात्मक परिणाम देती है।


सोमवार को आधी रात जलाई गई होली, कई जगह आज दहन; कल मनेगा रंगों का त्योहार
एक्सपोर्ट सेक्टर पर संकट, चमड़ा-रेडीमेड सहित कई सामानों की सप्लाई रुकी
रंगों के त्योहार पर प्रशासन अलर्ट, ओपीडी रहेगी बंद; मेट्रो और बिजली सेवाओं के लिए निर्देश
पश्चिम एशिया में तनाव का असर भारत पर: खाद्य तेल-उर्वरक आयात होंगे महंगे, शिपिंग कंपनियां लगा रहीं युद्ध अधिभार
आंकड़ा: गर्मी की फसलों का कुल रकबा घटा, पर दलहन व तिलहन का बुवाई रकबा बढ़ा; 0.31 लाख हेक्टेयर में बोया बाजरा
आज शेयर बाजार में ट्रेडिंग क्यों नहीं?: देश में कल रंगों का त्योहार, तो जानें किस वजह से नहीं हो रहा कारोबार