प्यास बुझाने भारत आए थे, जान गंवा बैठे! पाकिस्तानी जोड़े का राजस्थान में अंतिम संस्कार
भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे जैसलमेर के रेगिस्तानी इलाके में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सीमा के पास एक युवक और एक नाबालिग लड़की के संदिग्ध शव बरामद हुए. शवों के पास मिले पाकिस्तानी सिम कार्ड और आईडी दस्तावेजों ने इस मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया. अब इस रहस्यमयी घटना को लेकर कई सुरक्षा और मानवीय सवाल खड़े हो रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, दोनों शव करीब 10 दिन पुराने थे और अत्यंत दुर्गंध व क्षतिग्रस्त अवस्था में मिले.
मृतकों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए जैसलमेर प्रशासन ने स्थानीय सीमांत लोक संगठन और पाक विस्थापित हिंदू समाज के प्रतिनिधियों के माध्यम से पाकिस्तान में संभावित परिजनों से संपर्क की कोशिश की गई, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला. इस बीच शवों की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही थी. ऐसे में सीमांत लोक संगठन और जैसलमेर में बसे कुछ दूर के रिश्तेदारों की सहमति से, स्थानीय प्रशासन की निगरानी में रामगढ़ क्षेत्र के भील श्मशान घाट पर दोनों शवों का हिंदू रीतियों से अंतिम संस्कार किया गया.
दफनाए गए शव
इस प्रक्रिया में पाक विस्थापितों के लिए काम कर रहे सीमांत लोक संगठन के दिलीप सिंह सोढ़ा, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता नाथूराम भील और समाज के कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे. पाकिस्तानी कपल को दाह संस्कार की जगह दफनाया गया, ताकि शवों की स्थिति और पहचान के मुद्दे को ध्यान में रखते हुए धार्मिक भावनाओं और सामाजिक संतुलन का पालन हो सके. बताया जा रहा है कि प्यास के चलते दोनों की मौत हो गई. अंतिम संस्कार में जैसलमेर के ही कुछ स्थानीय पाक विस्थापित हिंदू समुदाय के रिश्तेदारों ने भी सहभागिता निभाई.
जांच में सुरक्षा एजेंसियां
प्रथम दृष्टया में सीमांत लोक संगठन का यह भी कहना है कि मृतक युगल की स्थिति और आसपास मिले सामान के आधार पर मामला सीमा पार से अनाधिकृत प्रवेश या पहचान विहीन घुसपैठ का हो सकता है. हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. मामले की गंभीरता को देखते हुए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), स्थानीय पुलिस, बीएसएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मामले की हर पहलू से गहन जांच कर रही हैं.
जांच रिपोर्ट से सुलझेगी कहानी
सीमावर्ती इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों, नेटवर्क कनेक्टिविटी, मोबाइल डाटा और लोकेशन रिकॉर्ड के आधार पर पड़ताल की जा रही है. इस पूरी घटना ने एक बार फिर देश की पश्चिमी सीमा पर घुसपैठ, पहचान संकट, मानव तस्करी और पाक प्रायोजित गतिविधियों के संदर्भ में चिंताओं को गहरा कर दिया है. इस पूरे मामले में अब सबकी निगाहें सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि यह केवल दो अज्ञात शवों की कहानी है या फिर किसी बड़ी साजिश की शुरुआत.


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