चूरू के भानुदा गांव में क्रैश हुआ जगुआर, मलबे में तब्दील हुआ विमान
जगुआर क्रैश: पायलटों ने अपनी जान देकर बचाई गांव की 3000 जिंदगियां
चूरू (राजस्थान) – राजस्थान के चूरू जिले में बुधवार को भारतीय वायु सेना का जगुआर फाइटर जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह हादसा रतनगढ़ के पास भानुदा गांव में हुआ, जिसमें भारतीय वायु सेना के दो जांबाज़ जवान वीरगति को प्राप्त हो गए। लेकिन इस हादसे से जुड़ी एक ऐसी बात सामने आई है जिसने पूरे देश का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, जगुआर फाइटर प्लेन में तकनीकी गड़बड़ी आने के बाद जब विमान नियंत्रण से बाहर हो गया, तब पायलटों ने इसे सीधे गांव की ओर गिरने से रोकते हुए अंतिम क्षणों में बीहड़ इलाके की ओर मोड़ दिया। गांव की आबादी करीब 3,000 है और यदि यह विमान वहां गिरता, तो एक बड़ी जनहानि निश्चित थी।
गांव ने देखा साहस और बलिदान का दृश्य
ग्रामीणों ने बताया कि हादसे से चंद मिनट पहले प्लेन बहुत निचाई पर उड़ता दिखा। कोई छत पर था, कोई खाना खा रहा था — सभी की नजरें अचानक आसमान में अनियंत्रित जहाज की ओर उठ गईं। पायलटों ने हर संभव प्रयास किया कि विमान आबादी से दूर जाकर गिरे। गांव से लगभग 500 मीटर पहले ही प्लेन बीहड़ में जा गिरा।
इजेक्ट का प्रयास, लेकिन समय ने नहीं दिया साथ
प्लेन क्रैश से पहले उसके टूटे शीशे मौके से बरामद हुए हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि पायलट ने अंतिम क्षणों में खुद को इजेक्ट करने की कोशिश की थी, लेकिन समय बहुत कम था। हादसे में दोनों पायलटों की मौके पर ही मृत्यु हो गई।
ग्रामीणों ने कहा – असली हीरो थे ये जवान
जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे, तो वहां केवल मलबा, धुआं और आग की लपटें थीं। विमान के अवशेष दूर-दूर तक बिखरे हुए थे। पायलटों के शरीर के टुकड़े भी घटनास्थल पर फैले हुए थे। ग्रामीणों को वहां से एक जली हुई घड़ी और ID कार्ड मिले, जिन्हें बाद में वायु सेना के अधिकारियों को सौंप दिया गया।
देश कर रहा है सलाम
इस हादसे ने जहां दो वीर पायलटों को खो दिया, वहीं उनकी सूझबूझ और साहस ने एक पूरे गांव को बचा लिया। ग्रामीण और देशवासी आज उन दोनों शहीदों को नमन कर रहे हैं, जिन्होंने अपनी जान देकर 3,000 जिंदगियों को बचा लिया।


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