डॉक्टर अरेस्ट केस: मरीजों पर संकट, निजी अस्पतालों की सेवाएं प्रभावित
जयपुर। एक चिकित्सक की गिरफ्तारी से शुरू हुआ विवाद अब राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा असर डालने की स्थिति में पहुंच गया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने साफ संकेत दे दिए हैं कि यदि सरकार ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया तो निजी स्वास्थ्य सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए प्रभावित हो सकती हैं। दरअसल, जयपुर के एक निजी अस्पताल के निदेशक डॉ. सोनदेव बंसल की गिरफ्तारी के विरोध में पहले ही राज्यभर में 24 घंटे का चिकित्सा बंद किया जा चुका है। आईएमए का दावा है कि यह बंद पूरी तरह सफल रहा और इससे सरकार को चिकित्सकों की एकजुटता का संदेश मिला है।
आईएमए का आरोप है कि जिस मामले में मेडिकल बोर्ड ने लापरवाही नहीं पाई, उसी में आरजीएचएस (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) से जुड़ी अनियमितताओं के आधार पर गिरफ्तारी करना पूरे चिकित्सा समुदाय को असुरक्षित करने जैसा है। संगठन का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से डॉक्टरों में भय का माहौल बन रहा है और वे स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पा रहे हैं। आईएमए का कहना है कि योजना में लंबे समय से भुगतान में देरी, क्लेम्स के मनमाने रिजेक्शन, पेनल्टी और एम्पैनलमेंट में पारदर्शिता की कमी जैसी समस्याएं बनी हुई हैं, जिन पर अब तक ठोस सुधार नहीं हुआ।
सरकार के सामने रखी गईं शर्तें
आईएमए ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में कई अहम मांगें रखी हैं—
- -डॉ. सोनदेव बंसल की तत्काल बिना शर्त रिहाई
- -गिरफ्तारी में शामिल पुलिस अधिकारियों की जांच
- -आरजीएचएस मामलों में कार्रवाई से पहले स्पष्ट SOP लागू करना
- -डॉक्टरों और अधिकारियों की संयुक्त उच्च स्तरीय समिति का गठन
- -लंबित भुगतानों और क्लेम्स का तय समय सीमा में निस्तारण
समाधान मिलने तक सेवाएं स्थगित
आईएमए ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक आरजीएचएस से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक इस योजना के तहत सेवाएं स्थगित रखी जाएंगी। साथ ही, यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो राज्यभर के चिकित्सा संगठन अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे।


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