फिलिस्तीन मुद्दे पर अनुपर्णा ने तोड़ी चुप्पी, सफाई देते हुए रखी अपनी बात
मुंबई: बीते दिनों अनुपर्णा रॉय ने अपनी फिल्म 'सॉन्ग्स ऑफ फॉरगॉटन ट्रीज' के लिए 82वें वेनिस फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार जीतकर इतिहास रच दिया था। उसी दौरान उन्होंने मंच पर एक भावुक भाषण दिया और अपनी जीत को दुनिया भर की सभी महिलाओं को समर्पित किया। वहीं दूसरी ओर अनुपर्णा ने फिलिस्तीन पर भी टिप्पणी की थी, जिसने विवाद खड़ा कर दिया। अब इस मामले पर उन्होंने प्रतिक्रिया दी है। आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा।
अन्याय के खिलाफ होने का मतलब ये नहीं, कि…
एएनआई से बातचीत करते हुए अनुपर्णा रॉय ने कहा, "मैंने फिल्म फेस्टिवल में जो कुछ भी कहा, वह मेरे इरादे से था। यह दुनिया भर में हो रहे अन्याय की ओर इशारा करने के इरादे से कहा गया था। अगर मैं फिलिस्तीन का समर्थन करती हूं, अगर मैं अन्याय के खिलाफ खड़ी हूं, तो इससे मैं कम भारतीय नहीं हो जाती। लोग सोच रहे होंगे कि मैंने पहली बार इस बारे में बात की है, लेकिन ऐसा नहीं है। मैंने रूस में एक पुरस्कार प्राप्त करते समय फिलिस्तीन का जिक्र किया था। इसका मतलब यह नहीं है कि मैं नेपाल में हो रहे नरसंहारों या हिंसा के बारे में बात नहीं करूंगी।’
उन्होंने कहा, ‘मैं सभी से अनुरोध करती हूं कि वे इस उपलब्धि का जश्न मनाएं और इसका इस तरह से राजनीतिकरण न करें। मैं बिल्कुल भी राजनीतिक नहीं हूं। मैं किसी भी राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्व नहीं करती।’
क्या अनुराग कश्यप के प्रभाव में आकर अनुपर्णा ने ये बोला?
अनुपर्णा ने आगे कहा, ‘लोग दावा कर रहे हैं कि मैंने अनुराग कश्यप के प्रभाव में आकर ये टिप्पणियां कीं। लेकिन मेरे निर्माताओं, मेरे गुरु और खुद अनुराग कश्यप ने मुझे सख्त सलाह दी थी कि मुझे इस बारे में बात करने की ज़रूरत नहीं है। मैंने उनकी सलाह से आगे जाकर सब कुछ कह दिया। अब मुझे समझ आया कि उन्होंने मुझे ऐसा करने से क्यों मना किया था। चीजें मेरे बिल्कुल खिलाफ जा रही हैं। लोग मुझे देशद्रोही भी कह रहे हैं। लेकिन मैं बिल्कुल नाराज नहीं हूं। मैंने एक फिल्म बनाई है और मैं दूसरी भी बनाऊंगी।’
अवॉर्ड जीतने वाली पहली भारतीय
'सॉन्ग्स ऑफ फॉरगॉटन ट्रीज' फिल्म में मंबई में दो महिलाओं - एक प्रवासी अभिनेत्री और एक कॉर्पोरेट कर्मचारी के बीच के रिश्ते की कहानी दिखाई गई है। इसी फिल्म के लिए अनुपर्णा को वेनिस फिल्म फेस्टिवल के ओरिजोंटी खंड में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार जीतने जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।


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