कानूनी दांव-पेंच का दौर: हाईकोर्ट पहुंचने से प्रभावित हुई निचली अदालत की कार्यवाही, सस्पेंस बरकरार।
अजमेर | विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे से जुड़ी कानूनी लड़ाई अब एक नए मोड़ पर है। शनिवार को जिला न्यायालय में इस संवेदनशील विषय पर संक्षिप्त सुनवाई हुई। अदालत ने विभिन्न पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अगली कार्यवाही के लिए 2 मई 2026 का दिन तय किया है। संभावना है कि इसी दिन मामले में नए पक्षकारों को शामिल करने से जुड़ी लंबित अर्जियों पर कोई ठोस निर्णय लिया जा सकेगा।
हाईकोर्ट के दखल से बदला घटनाक्रम
सुनवाई के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए याचिकाकर्ता विष्णु गुप्ता ने कहा कि वे कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बहस के लिए तैयार होकर आए थे, लेकिन कानूनी तकनीकी कारणों से सीमित आवेदनों पर ही चर्चा हो पाई। उन्होंने बताया कि इस मामले से जुड़ा एक पक्ष हाईकोर्ट चला गया है, जिसके कारण निचली अदालत की प्रक्रिया में कुछ फेरबदल हुआ है। फिलहाल कोर्ट का पूरा ध्यान उन आवेदनों के निपटारे पर है जिनमें नए लोगों ने इस केस का हिस्सा बनने की मांग की है।
मई की सुनवाई होगी निर्णायक
आगामी 2 मई को होने वाली सुनवाई काफी अहम मानी जा रही है। उसी दिन अदालत यह स्पष्ट कर सकती है कि इस कानूनी जंग में किन-किन नए आवेदकों को पक्षकार के तौर पर अपनी बात रखने की अनुमति दी जाएगी। जब तक पक्षकारों की स्थिति साफ नहीं होती, तब तक मुख्य वाद पर विस्तृत बहस शुरू होना संभव नहीं है। ऐतिहासिक तथ्यों और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा होने के कारण इस मामले पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।


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