सेवानिवृत्ति के बाद कड़ा एक्शन, पेंशन-ग्रेच्युटी पर रोक
लखनऊ|कानपुर कलेक्ट्रेट के सजायाफ्ता वरिष्ठ सहायक को रिटायरमेंट के करीब साढ़े सात साल बाद जिलाधिकारी ने बर्खास्त कर दिया है। हत्या के मामले में वरिष्ठ सहायक को उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है। फिलहाल उसे पेंशन और ग्रेच्युटी भी अब नहीं मिलेगी। कानपुर जिले में सेवानिवृत्ति के बाद बर्खास्तगी का यह पहला मामला है। प्रशासन अब हाईकोर्ट में चल रहे मामले में बर्खास्तगी की जानकारी देगा।कलेक्ट्रेट के वरिष्ठ सहायक मलखान सिंह एआरके के पद पर अभिलेखागार में तैनात था। उसके खिलाफ 2012 में शिवराजपुर थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। 2014 में मलखान सिंह को निलंबित करके विभागीय कार्रवाई चलाई गई। इसी बीच जमानत पर छूटकर आने के बाद मलखान सिंह को बहाल कर दिया गया। उसकी जांच पर किसी ने निर्णय नहीं लिया। 2017 में मलखान सिंह को हत्या के मामले में सजा सुना दी गई। उसे जेल भेज दिया गया। सजा के आदेश के बाद 23 जून 2018 को मलखान सिंह को फिर से निलंबित करके जांच तत्कालीन एसीएम चतुर्थ को दे दी गई।जेल में रहते हुए मलखान सिंह 31 जुलाई 2018 को सेवानिवृत्त हो गया। इसके बाद उसके द्वारा उच्च न्यायालय में अपील दायर की गई, जिसमें 18 मई 2023 को जमानत मिल गई। इसी बीच हाईकोर्ट में अर्जी देकर मलखान सिंह ने पेंशन, ग्रेच्युटी की मांग की। इसकी सुनवाई करते हुए डीएम ने दोष सिद्ध की तारीख से वरिष्ठ सहायक को बर्खास्त कर दिया है। इस मामले में डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि दोषसिद्ध की तारीख से वरिष्ठ सहायक मलखान सिंह को बर्खास्त किया गया है। उसको पेंशन-ग्रेच्युटी नहीं मिलेगी।
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मामले को दबाए रहे अफसर, चलती रही जांच
23 जून 2018 को दोबारा मलखान सिंह को निलंबित करते हुए जांच एसीएम चतुर्थ को दी गई। अगले महीने मलखान सिंह सेवानिवृत्त हो गया। इसके बावजूद आठ साल तक मलखान सिंह की जांच दबी रही। अफसर भी मामले को दबाए रहे। जब हाईकोर्ट में मलखान सिंह ने पेंशन और ग्रेच्युटी मांगी के लिए याचिका दाखिल की तो अफसर दोबारा सक्रिय हो गए। शासन की अनुमति से मलखान को बर्खास्त किया गया। अभी तक मामले को दबाए हुए अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि उसको पहले ही दोषसिद्ध की तारीख से बर्खास्त हो जाना चाहिए था।


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