फेक मैसेज से भड़का विवाद, राजस्थान देवस्थान विभाग ने किया पुख्ता बयान
राजस्थान में देवस्थान विभाग की 27 अक्टूबर को हुई एक नियमित समीक्षा बैठक के आधार पर सोशल मीडिया पर फैलाया गया एक फर्जी धार्मिक मैसेज बड़ा विवाद बन गया है. मामले की जांच के लिए गठित कमेटी ने इस वायरल मैसेद को झूठा करार दिया है|
जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि वायरल मैसेज मनगढ़ंत, भ्रामक और धार्मिक भावनाएं भड़काने वाला था. देवस्थान आयुक्त कन्हैयालाल स्वामी की अध्यक्षता में गठित जांच समिति के सामने अधिकारियों ने इस पर अपनी बात रखी. इस मैसेज विवाद पर आरएएस अधिकारी की भूमिका पर लोगों ने सवाल खड़े करना शुरू कर दिए हैं, क्योंकि अधिकारी उन सभी ग्रुपों के एडमिन हैं जिनसे यह मैसेज फैलाया गया|
वायरल मैसेज पर अधिकारियों ने क्या कहा?
इस वायरल मैसेज के विवाद बढ़ने के बाद अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बैठक में किसी प्रकार की धार्मिक चर्चा नहीं हुई. वायरल मैसेज का उद्देश्य सरकार व देवस्थान विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाना था|
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि मैसेज में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और मुख्यमंत्री तक के नाम घसीटे गए, जो न सिर्फ भ्रामक था, बल्कि धार्मिक भावनाएं भड़काने का प्रयास भी करता था. जांच में आरएएस अधिकारी पंकज ओझा की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठे|
आरएएस अधिकारी पर उठे सवाल
आरएएस अधिकारी पंकज ओझा की भूमिका पर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं. बता दें कि ओझा उन वाट्सऐप ग्रुपों के एडमिन पाए गए, जिन पर यह मैसेज वायरल हुआ. यह बैठक देवस्थान विभाग शासन सचिव समित शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित हुई थी|
बैठक के कुछ ही समय बाद सोशल मीडिया पर यह मैसेज वायरल हो गया. मामले में आरएएस अधिकारी पंकज ओझा ने जांच कमेटी और उसकी रिपोर्ट की जानकारी होने से इनकार किया है. फिलहाल इस मैसेज को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है, लेकिन कमेटी ने इस पर सफाई देकर झूठा और भ्रामक बताया है|


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