राजस्थान विधानसभा में पास हुआ बिल: जबरन धर्मांतरण पर आजीवन कारावास का प्रावधान, जानें कानून की खास बातें
जयपुर: राजस्थान विधानसभा में राजस्थान विधिविरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2025 पारित हो गया है। अब यह बिल राज्यपाल के पास जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति को भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह बिल कानूनी रूप लेगा। इस विधेयक में सरकार ने जबरन धर्म परिवर्तन कराए जाने के खिलाफ सख्त प्रावधान किए हैं। जबरन धर्म परिवर्तन कराए जाने के दोषी पाए जाने वालों को अब उम्रकैद की सजा होगी। साथ ही 25 लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है। धर्म परिवर्तन कराने वाली संस्थाओं की इमारतों पर बुलडोजर चलाए जाने का प्रावधान भी जोड़ा गया है।
तीसरी बार विधानसभा में पास हुआ बिल
धर्मांतरण विरोधी बिल राजस्थान विधानसभा में तीसरी बार पास हुआ है। इससे पहले वर्ष 2006 और वर्ष 2008 में भी धर्मांतरण विरोधी बिल पास हुए थे। ये दोनों बिल पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सरकार के समय लाए गए थे। राष्ट्रपति की ओर से मंजूरी मिलने के बाद अटॉर्नी जनरल द्वारा आपत्ति लगाए जाने के कारण ये बिल कानून रूप में लागू नहीं हो सके।
कमजोर तबकों की सुरक्षा के लिए जरूरी - गृह राज्य मंत्री
राजस्थान विधानसभा में धर्मांतरण विरोधी बिल पारित होने के बाद गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि यह विधेयक प्रदेश में समरसता को बनाए रखने और सुरक्षित भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है, लेकिन इसमें धोखे, प्रलोभन, भय और छल कपट से धर्म परिवर्तन करवाने का कहीं भी समर्थन नहीं किया गया है। समाज में शांति एवं सद्भाव बनाने के लिए यह एक उचित कदम है। सुनियोजित रूप से धर्मांतरण करने वाले लोगों द्वारा समाज के कमजोर वर्गों को निशाना बनाया जाता है। धर्मांतरण विरोधी कानून बनने पर ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा।
25 लाख रुपए जुर्माना और आजीवन कारावास की सजा
विधेयक के अनुसार छल कपट से धर्म परिवर्तन करने पर 7 से 14 वर्ष तक के कारावास से दंडित किया जा सकेगा। साथ ही न्यूनतम 5 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। अल्प वयस्क, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांगजन आदि को कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराने पर न्यूनतम 10 से लेकर 20 वर्ष तक के कारावास से दंडित किया जा सकेगा और न्यूनतम 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। कपटपूर्ण तरीकों से सामूहिक धर्म परिवर्तन करवाने वाले व्यक्तियों को न्यूनतम 20 वर्ष से आजीवन कारावास तक की सजा हो सकेगी। दोषियों पर न्यूनतम 25 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जा सकेगा। धर्म परिवर्तन के लिए विदेशी एवं अवैध संस्थाओं से धन प्राप्त करने वाले व्यक्तियों को न्यूनतम 10 से 20 वर्ष तक के कठोर कारावास से दंडित किया जा सकेगा और न्यूनतम 20 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।
विवाह को शून्य घोषित किया जाएगा
धर्म परिवर्तन के लिए की गई शादी को शून्य घोषित किए जाने का प्रावधान भी जोड़ा गया है। अगर कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से शादी करता है तो ऐसे मामलों में कोर्ट के जरिए शादी को शून्य कराया जा सकेगा। यानी केवल धर्म परिवर्तन के लिए किसी महिला या पुरुष ने शादी की है और शादी के पहले या बाद में धर्म बदला है तो ऐसी शादी को रद्द कराया जा सकेगा।
इन राज्यों में लागू है धर्मांतरण विरोधी कानून
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने यह जानकारी भी दी की राजस्थान से पहले देश के कई राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानून लाए जा चुके हैं। अरुणाचल प्रदेश में वर्ष 1978, आंध्र प्रदेश में 2007, उत्तराखंड में 2018, हिमाचल प्रदेश में 2019, उत्तर प्रदेश में 2021, कर्नाटक में 2021 और हरियाणा में 2022 में धर्मांतरण विरोधी कानून लाए जा चुके हैं। राजस्थान में भी तत्कालीन सरकार द्वारा 2008 में धर्मांतरण विरोधी कानून लाया गया था लेकिन अटॉर्नी जनरल की आपत्ति की वजह से यह लागू नहीं हो सका। अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व में जबरन धर्मांतरण पर पूर्णतया लगाम लगाने हेतु सख्त कानून प्रदेश की विधानसभा में लाया गया है।


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