पाठ्यक्रम विवाद में राजनीतिक रंग गहराया, विद्यार्थियों का भविष्य बना मुद्दा
राजस्थान के सरकारी स्कूलों इतिहास का सिलेबस सियासत की फुटबॉल बना हुआ है। सत्ता बदलने के साथ ही सिलेबस भी सत्ताधारी पार्टी की विचारधार वाला बनाए जाने की कवायद शुरू हो जाती है। ताजा विवाद राजस्थान में 12वीं की किताब आजादी के बाद का स्वर्णिम इतिहास को लेकर शुरू हो गया है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा है कि किताब में कांग्रेसी प्रधानमंत्रियों पर कंटेंट ज्यादा है इसलिए इसे नहीं पढ़ाएंगे।
वहीं माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सचिव कैलाशचंद शर्मा का कहना है कि किताब का सिलेबस तो एक साल पहले ही फाइनल हो जाता है इसलिए इस साल की किताबें छप चुकी हैं। अब सरकार चाहती है तो बोर्ड सिलेबस की समीक्षा भी कर लेगा लेकिन समस्या यह है कि बोर्ड में तीन साल से कोई नियुक्ति ही नहीं हुई है।
कक्षा 11-12 में भाग-1 और भाग-2 के रूप में पिछली कांग्रेस सरकार के समय से पढ़ाई जा रही किताबों को लेकर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का कहना है कि हम ऐसी किताब नहीं पढ़वाएंगे, जो सिर्फ कांग्रेस को ही महिमामंडित कर रही हैं। ऐसा लग रहा है, जैसे सबकुछ कांग्रेस ने ही किया है। दिलावर बोले- इसमें लोकतंत्र की हत्या करने वालों की गाथाएं हैं। फोटो तो छोड़िए पीएम मोदी के योगदान का विस्तृत उल्लेख तक नहीं है।
दरअसल ज्यादा विवाद किताब के भाग-2 पर है। इसके कवर समेत अलग-अलग पेजों पर इंदिरा, राजीव गांधी, जवाहरलाल नेहरू व मनमोहन सिंह तक के 15 से ज्यादा फोटो हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक भी नहीं।


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